हैज़मैट सूट पहने मेडिकल टीमों ने इस सप्ताह क्रूज़ शिप MV Hondius से संदिग्ध हंटावायरस मरीजों को एयर एम्बुलेंस के जरिए निकाला, क्योंकि वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों ने दुर्लभ वायरस प्रकोप को रोकने के प्रयास तेज कर दिए हैं।
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों में स्वास्थ्यकर्मी रेस्पिरेटर, फेस शील्ड और सुरक्षात्मक गाउन पहने मरीजों को स्ट्रेचर पर एयर एम्बुलेंस तक ले जाते दिखाई दिए। लगभग 150 यात्रियों और क्रू मेंबर्स को लेकर चल रहे इस डच फ्लैग वाले एक्सपेडिशन जहाज को अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल का केंद्र माना जा रहा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार यह प्रकोप संभवतः Andes strain से जुड़ा है, जो हंटावायरस का ऐसा दुर्लभ प्रकार है जिसमें सीमित मानव-से-मानव संक्रमण की क्षमता देखी गई है।
अधिकारियों ने हैज़मैट सूट का इस्तेमाल क्यों किया?
हंटावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम सामान्यतः संक्रमित चूहों के मूत्र, लार या मल के संपर्क से फैलता है। हालांकि Andes strain के कुछ मामलों में इंसानों के बीच सीमित संक्रमण देखा गया है।
इसी कारण मेडिकल टीमों ने मरीजों को स्थानांतरित करते समय अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाए। स्वास्थ्यकर्मियों ने विशेष रेस्पिरेटर, इम्परमेएबल गाउन, दस्ताने और आंखों की सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल किया।
WHO ने स्पष्ट किया कि ये कदम केवल एहतियात के तौर पर उठाए गए हैं और फिलहाल व्यापक स्तर पर हवा के जरिए संक्रमण के प्रमाण नहीं मिले हैं।
स्वास्थ्य एजेंसियों ने तेज किए राहत और बचाव प्रयास
रिपोर्ट्स के अनुसार जहाज के डॉक्टर समेत कई लोगों को गंभीर लक्षण विकसित होने के बाद एयर एम्बुलेंस के जरिए यूरोप के अस्पतालों में पहुंचाया गया।
जहाज पर मौजूद यात्रियों को अस्थायी रूप से केबिन में रहने के निर्देश दिए गए, जबकि स्वास्थ्य टीमें संक्रमित लोगों और उनके संपर्क में आए यात्रियों की जांच करती रहीं।
स्पेन ने Canary Islands में जहाज को डॉक करने की अनुमति दी है, जहां विशेष मेडिकल और आइसोलेशन सुविधाएं मौजूद हैं।
क्रूज़ शिप पर वायरस प्रकोप को नियंत्रित करना क्यों मुश्किल है?
विशेषज्ञों के अनुसार क्रूज़ शिप में संक्रमण नियंत्रण चुनौतीपूर्ण होता है क्योंकि यात्री लंबे समय तक बंद स्थानों और साझा वेंटिलेशन सिस्टम का उपयोग करते हैं।
MV Hondius अप्रैल में अर्जेंटीना के Ushuaia से रवाना हुआ था और दक्षिण अटलांटिक क्षेत्रों से गुजर रहा था, तभी संक्रमण की पहचान हुई।
अब कई देशों में लैब टेस्टिंग, जीनोमिक सीक्वेंसिंग और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की जा रही है ताकि संक्रमण के स्रोत और फैलाव का पता लगाया जा सके।
आगे क्या होगा?
स्पेन पहुंचने के बाद यात्रियों की मेडिकल स्क्रीनिंग, लैब टेस्ट और निगरानी की जाएगी।
WHO का कहना है कि जांच अभी जारी है और जीनोमिक विश्लेषण से यह समझने में मदद मिलेगी कि संक्रमण पर्यावरणीय संपर्क से फैला या सीमित मानव संक्रमण हुआ।
यह घटना 2026 की सबसे चर्चित वैश्विक स्वास्थ्य आपात स्थितियों में से एक बन चुकी है।


























