जामिया मिलिया इस्लामिया के डॉ. हसन राजा नकवी को प्रतिष्ठित फुलब्राइट नेहरू फेलोशिप 2026 से सम्मानित किया गया है। जेएमआई के भूगोल विभाग में सहायक प्रोफेसर डॉ. नकवी नौ महीने अमेरिका में बाढ़ जोखिम और जलवायु अनुकूलन पर उन्नत शोध करेंगे।
फुलब्राइट नेहरू फेलोशिप को भारत और अमेरिका के बीच सबसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों में से एक माना जाता है — और हर साल देश भर से केवल चुनिंदा विद्वानों को ही यह अवसर मिलता है।
फुलब्राइट नेहरू फेलोशिप क्या है?
फुलब्राइट नेहरू अकादमिक और व्यावसायिक उत्कृष्टता फेलोशिप भारत और अमेरिका की सरकारों की एक संयुक्त पहल है। यह भारतीय शिक्षाविदों और पेशेवरों को अमेरिका के शीर्ष संस्थानों में शोध, शिक्षण और व्यावसायिक विकास के लिए वित्त पोषित करती है।
इस अत्यंत प्रतिस्पर्धी फेलोशिप के लिए हर साल पूरे भारत से केवल मुट्ठी भर विद्वान चुने जाते हैं — जो डॉ. नकवी की उपलब्धि को उनके लिए व्यक्तिगत रूप से और जामिया मिलिया इस्लामिया के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बनाता है।
डॉ. नकवी का शोध: बाढ़ जोखिम के लिए GeoAI
फुलब्राइट नेहरू फेलोशिप 2026 के तहत डॉ. नकवी यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोइस, शिकागो में डॉ. फरीद पेइरावियन और प्रोफेसर क्रिस्टोफर बर्क के साथ काम करेंगे।
उनका शोध प्रोजेक्ट है — "क्लाइमेट डेटा से रेजिलिएंस तक: भारत की पेरियार और अमेरिका की अपर इलिनोइस नदी घाटियों के लिए बाढ़ जोखिम और अनुकूलन योजना में जियोस्पेशियल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दृष्टिकोण।"
यह शोध GeoAI, जलवायु डेटा विश्लेषण और स्थानिक निर्णय-सहायता प्रणालियों का उपयोग करके बाढ़ जोखिम का आकलन करेगा और दोनों नदी घाटियों के लिए अनुकूलन रणनीतियां विकसित करेगा।
शोध के निष्कर्ष भारत और अमेरिका दोनों में नीति निर्माताओं, शहरी योजनाकारों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के लिए उपयोगी साबित होंगे।
डॉ. नकवी की शैक्षणिक यात्रा
डॉ. हसन राजा नकवी ने सीसीएसयू मेरठ से भूगोल में स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई पूरी की और 2013 में जेएमआई के भूगोल विभाग से पीएचडी की उपाधि हासिल की।
उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में 50 से अधिक शोध लेख प्रकाशित किए हैं। भारत, अमेरिका, फ्रांस, इथियोपिया, चीन और ताइवान में शोध प्रस्तुतियां दे चुके हैं।
डॉ. नकवी ने आईसीएसएसआर द्वारा वित्त पोषित एक भारत-ताइवान संयुक्त शोध परियोजना को मुख्य अन्वेषक के रूप में सफलतापूर्वक पूरा किया है। वे डीएसटी और सीडब्ल्यूबीसी द्वारा वित्त पोषित अन्य शोध परियोजनाओं पर भी काम कर रहे हैं।
2024 में उन्हें फ्रांस के वैज्ञानिक उच्च स्तरीय विजिटिंग फेलोशिप से भी नवाजा गया था — यानी फुलब्राइट नेहरू फेलोशिप 2026 उनकी दो वर्षों में दूसरी बड़ी अंतर्राष्ट्रीय फेलोशिप है।
उनकी विशेषज्ञता के क्षेत्र भौतिक भूगोल, प्राकृतिक आपदाएँ, जलवायु सहनशीलता (क्लाइमेट रेज़िलिएंस), वायु प्रदूषण और भू-स्थानिक (जियोस्पेशियल) प्रौद्योगिकियाँ हैं — यह अनूठा संयोजन उन्हें भारत में अनुप्रयुक्त जलवायु अनुसंधान (Applied Climate Research) के अग्रणी विशेषज्ञों में शामिल करता है।
जेएमआई कुलपति ने दी बधाई
जामिया मिलिया इस्लामिया के कुलपति प्रोफेसर मजहर आसिफ, रजिस्ट्रार प्रोफेसर एमडी मेहताब आलम रिजवी और छात्र कल्याण डीन प्रोफेसर नीलोफर अफजल ने डॉ. नकवी को व्यक्तिगत रूप से बधाई दी और उन्हें स्मारक स्टोल पहनाकर सम्मानित किया।
विश्वविद्यालय नेतृत्व ने अमेरिका में उनके शैक्षणिक प्रवास के लिए पूर्ण संस्थागत और प्रशासनिक सहायता का आश्वासन भी दिया।
जेएमआई के लिए क्या मायने रखती है यह उपलब्धि
डॉ. नकवी का फुलब्राइट नेहरू फेलोशिप 2026 के लिए चयन न केवल उनकी व्यक्तिगत उत्कृष्टता का प्रमाण है, बल्कि अभिनव और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त शोध के केंद्र के रूप में जामिया मिलिया इस्लामिया की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा को भी दर्शाता है।
जलवायु विज्ञान, जियोस्पेशियल तकनीक और आपदा जोखिम प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भारतीय विशेषज्ञता की बढ़ती अंतर्राष्ट्रीय मांग इस उपलब्धि से और उजागर होती है।


























