Nepal flood disaster ने अब तक कम से कम 469 लोगों की जान ले ली है, सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब 2,500 लोग अभी भी लापता हैं, जिनमें 589 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं — ये सब चीन सीमा के पास ग्लेशियर और चट्टान खिसकने से आई भीषण बाढ़ की वजह से हुआ, जो इस इलाके की हाल के सालों की सबसे भयानक आपदाओं में से एक बन गई है।
कैसे हुआ ये हादसा
बुधवार सुबह नेपाल-तिब्बत सीमा के पहाड़ी इलाके में ये तबाही हुई, जब हिमालय में एक ग्लेशियर और चट्टान खिसकने से एक "बैरियर लेक" बन गई — ये उस जगह के पास बनी जहां नेपाल की छोचेन खोला नदी, पुरेपु त्सांगपो नदी से मिलती है, जो आगे चीन में बहती है। जब ये बैरियर टूटा, तो एक भीषण फ्लैश फ्लड और मडस्लाइड ने भोटेकोशी इलाके के गांवों को तबाह कर दिया — घर, सड़कें, पुल और हाइड्रोपावर इंफ्रास्ट्रक्चर सब चपेट में आ गए।
रसुवा और नुवाकोट जिलों में सबसे ज्यादा तबाही हुई — त्रिशूली और बिदुर म्यूनिसिपैलिटी के देवीघाट जैसे शहर मलबे और कीचड़ में दब गए। बचे हुए लोगों ने बताया कि घर बाढ़ के पानी से घिर गए थे, कई लोग छतों पर फंसे रह गए जब पानी बढ़ता गया।
जीवितों की तलाश जारी
शनिवार तक, अधिकारियों ने चेतावनी दी कि आपदा में जीवित बचने की 72 घंटे की "गोल्डन विंडो" खत्म हो रही है, जिससे कई लापता लोगों की उम्मीदें कमजोर पड़ रही हैं। प्रभावित जिलों में सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए 8,300 से ज्यादा सैनिक तैनात किए गए हैं, साथ ही ड्रोन टीमें रसुवा में नुकसान का आकलन करने और जीवितों को ढूंढने में जुटी हैं।
लापता लोगों में काठमांडू यूनिवर्सिटी के तीन छात्र भी शामिल हैं, जो अपर त्रिशूली 3बी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में इंटर्नशिप कर रहे थे और अभी भी संपर्क में नहीं आ पाए हैं, यूनिवर्सिटी के मुताबिक। विदेश में रह रहे परिवार, खासकर नेपाली डायस्पोरा के लोग, अपने प्रियजनों की खबर का बेचैनी से इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि कुछ प्रभावित इलाकों से संपर्क अभी भी मुश्किल बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय मदद
चीन ने सीधे प्रभावित इलाके में राहत सामग्री भेजी है — दो सैन्य ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के जरिए 13,200 सामान पहुंचाए गए, जिनमें टेंट, कंबल और फर्स्ट-एड किट शामिल हैं। चीनी अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने लापता लोगों में शामिल अपने नागरिकों की जानकारी संबंधित दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को दे दी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका नेपाल को "किसी भी तरह की मदद" भेजने को तैयार है, जैसे-जैसे इस दूरदराज सीमा क्षेत्र में फैले मानवीय संकट की गंभीरता पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान बढ़ रहा है।
इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान, इलाका कटा हुआ
इस आपदा ने इलाके में आवाजाही और कनेक्टिविटी को बुरी तरह प्रभावित किया है। काठमांडू से जोड़ने वाला अहम मार्ग, पृथ्वी हाईवे, धादिंग जिले में कृष्णभीर और परेवा भीर में हुए भूस्खलन के बाद पूरी तरह बंद हो गया — लगातार भारी बारिश की वजह से कोशी, बागमती और कर्णाली प्रांतों में परिवहन व्यवस्था और भी बिगड़ती जा रही है।
शुरुआती अनुमानों के मुताबिक भोटेकोशी बाढ़ ने इलाके के हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स और बिजली ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचाया है, हालांकि नुकसान की पूरी सीमा, इंश्योरेंस कवरेज और पुनर्निर्माण की लागत अभी स्पष्ट नहीं है।
बढ़ता आंकड़ा
सर्च ऑपरेशन जारी रहने के साथ मौत का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका है। ये आपदा नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र में हाल के सालों की सबसे भयानक प्राकृतिक आपदाओं में से एक बनकर उभरी है। हादसे की जांच कर रहे वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नदी को अस्थायी रूप से बांध गया था, और बाद में टूटने से बाढ़ आई — जलवायु शोधकर्ताओं का कहना है कि बढ़ते तापमान से हिमालयी ग्लेशियर अस्थिर हो रहे हैं, जिससे ऐसी घटनाएं भविष्य में और ज्यादा हो सकती हैं।
रेस्क्यू टीमें समय और बिगड़ते मौसम के खिलाफ रेस लगा रही हैं, आने वाले दिन ये तय करने में अहम होंगे कि आखिरी तौर पर मौतों का आंकड़ा कितना बढ़ेगा, और प्रभावित समुदायों के सामने पुनर्वास की कितनी बड़ी चुनौती होगी।


























