दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास में एक भावुक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहाँ छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और धार्मिक नेताओं ने ईरान के मिनाब स्कूल हमले में मारे गए बच्चों को श्रद्धांजलि दी। यह आयोजन दुख, एकता और शांति की अपील का प्रतीक बन गया।
इस प्रदर्शनी का शीर्षक था “मिनाब के बच्चे अब भी सूरज बनाते हैं” जिसमें मलबे से बरामद बच्चों की पेंटिंग्स को प्रदर्शित किया गया। ये चित्र बच्चों के सपनों, उम्मीदों और मासूमियत को दर्शाते हैं।
दर्दनाक घटना
28 फरवरी 2026 को मिनाब स्कूल पर हुए हमले में लगभग 168 बच्चों की जान चली गई। इस घटना ने दुनिया भर में शोक और चिंता पैदा की, खासकर छात्रों के बीच, जिन्होंने खुद को इन बच्चों से जुड़ा हुआ महसूस किया।
प्रतीक जो दिल छू गए
दिल्ली के छात्रों ने सफेद कपड़े में लिपटे और लाल रंग से सने स्कूल बैग उठाए, जो मासूमों के खोए जीवन का प्रतीक थे। यह दृश्य उन बच्चों की याद दिला रहा था जो पढ़ने गए लेकिन वापस नहीं लौट सके।
छात्राओं ने पोस्टर के जरिए सवाल उठाया:
“क्या एक छोटी बच्ची और छात्र ही आपका निशाना हैं?”
यह संदेश गहराई से लोगों के दिलों को छू गया और इस घटना को वैश्विक समुदाय के सामने एक नैतिक सवाल बना दिया।
धर्म से ऊपर इंसानियत
इस कार्यक्रम में हिंदू, मुस्लिम और सिख समुदाय के लोग एक साथ शामिल हुए। यह एकता का संदेश था कि दुख की घड़ी में इंसानियत सबसे बड़ी होती है।
शांति की अपील
कार्यक्रम के अंत में लोगों ने प्रार्थना की, मोमबत्तियाँ जलाईं और विश्व समुदाय से अपील की कि बच्चों को युद्ध से बचाया जाए। यह आयोजन सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि शांति के लिए एक मजबूत संदेश भी था।




















